Followers

Monday, May 23, 2011

इंतज़ार


वल्लाह नये दर्द रुलाने के वास्ते,
यादें पुरानी सिर्फ लुभाने के वास्ते.
कुछ तल्खियाँ भी बनके रहीं बोझ हमेशा,
कुछ बात के नश्तर हैं चुभाने के वास्ते.
रहमत से तेरी हम ही हैं महरूम, मगर क्यों ?
दर तो खुला था तेरा ज़माने के वास्ते.
ज़ख्मों की दिल में एक नुमाइश लगी रही,
ऐ मेरे ख़ुदा तुझको दिखाने के वास्ते.
सोचा था तुझ से अब न शिकायत करेंगे हम,
थपकी भी दी थी मन को सुलाने के वास्ते.
तेरा है इंतज़ार मुझे अब भी 'साधना'
हैं अश्क रवां तुझको बुलाने के वास्ते.


साधना वैद