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Saturday, December 3, 2011

संशय



नभ में कितने तारे रोज़ निकलते हैं
कौन सितारा मुझको राह दिखायेगा ,
किसकी ज्योति करेगी मेरा पथ उजला
कौन पकड़ कर हाथ पार ले जायेगा !


उपवन में कितनी कलियाँ नित खिलती हैं
किसका सौरभ जीवन को महकायेगा ,
किसकी सुषमा अंतर सुन्दर कर देगी
किसका पारस परस प्राण भर जायेगा !
नदिया में नित कितनी लहरें उठती हैं
मन की पीड़ा कौन बहा ले जायेगी ,
सदियों से प्यासे इस मेरे तन मन को
अपने अमृत से प्लावित कर जायेगी !
दूर गगन में कितने पंछी उड़ते हैं
कौन लौट कर वापिस घर को आयेगा ,
किसके पंखों की धीमी आहट सुन कर
बूढ़ी माँ का हृदय धीर पा जायेगा !

कितने संशय मन में घर कर जाते हैं
कितने प्रश्नों से अंतर अकुलाता है ,
है वह आखिर एक कौन सा पल ऐसा
जिसमें मन का हर उत्तर मिल जाता है !

साधना वैद