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Friday, February 10, 2012

तुम मिले जग मिल गया







कुछ मधुर तुम कान में जो कह गये

शूल मन के वेग से सब बह गये !


मलय ने आँचल मेरा लहरा दिया ,

भाव विह्वल गीत सारे हो गये !


पुष्प वासंती हृदय में खिल उठे ,

प्राण सुरभित एक पल में हो गये !


मन विहग ने क्षितिज तक भर ली उड़ान ,

स्वर मुखर हर इक दिशा में हो गये !


पवन पी पीयूष प्याला प्रेम का ,

प्रिय परस की वंचना में खो गये !


नयन उन्मीलित पुलक कर लाज से

प्रिय दरस की साध लेकर खुल गये !


अधर अस्फुट गीत दोहराते रहे ,

स्वप्न सब साकार जैसे हो गये !


निमिष भर को तुम मिले जग मिल गया ,

प्रार्थना के स्वर सफल सब हो गये !



साधना वैद