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Thursday, December 17, 2015

हम कब जागेंगे


दामिनी ( निर्भया ) के साथ घटी दुर्दांत घटना को बीते हुए तीन साल हो गये हैं लेकिन क्या हम ज़रा सा भी चेते हैं ? क्या समाज में इस तरह की घिनौनी घटनाओं की आवृत्ति में कुछ कमी आई है ? क्या ऐसी घटिया मानसिकता वाले लोगों के मन में कुछ शर्मिंदगी भय और पश्चाताप का लेश भर भी अंश बढ़ा है ? शायद नहीं ! क्योंकि हमारी न्याय व्यवस्था उसी धीमी रफ़्तार से चल रही है ! अपराधियों के हौसलों को बुलंद रखने में हर तरह से मदद करने वाले हमारे बचाव पक्ष के घाघ वकील क़ानून के लूप होल्स का फ़ायदा उठा बहस को इतना उलझा देते हैं कि इन्साफ की कुर्सी पर बैठे न्यायाधीशों के लिये भी किसी नतीजे पर पहुँचना बहुत मुश्किल हो जाता है ! तारीखों पर तारीखें पड़ती रहती हैं, अपराधी बेख़ौफ़ बाहर घूमते रहते हैं, सबूतों से छेड़छाड़ होती रहती है और गवाहों की खरीद फरोख्त पर भी कोई अंकुश नहीं लगा पाता ! हम कहाँ जा रहे हैं ? क्या इसके लिये हमें कुछ भी नहीं करना चाहिए ! इसी दर्द के साथ मैंने तब एक पोस्ट लिखी थी उसे आज फिर से आप सबके साथ साझा करना चाहती हूँ क्योंकि मुझे आज भी यही महसूस हो रहा है कि हम लोग कैडिल कल्चर से आगे एक कदम भी नहीं बढ़े हैं !
कुछ तो करना होगा
‘दामिनी’ अंतिम बार कौंध कर सदा के लिए बादलों के पीछे छिप गयी ! लेकिन उसकी यह कौंध सदियों से गहन अन्धकार में डूबी अपनी शक्ति एवं क्षमताओं से बेखबर नारी जाति को पल भर में ही जगा कर चार्ज कर गयी ! उस मासूम बच्ची का यह समाज सदा ऋणी रहेगा जिसने अपना बलिदान देकर स्त्री जाति के सोये आत्मसम्मान को झकझोर कर जगा दिया है !
दामिनी के साथ क्या हुआ, क्यों हुआ उसे दोहराना नहीं चाहती ! दोहराने से कोई फ़ायदा भी नहीं है ! हमारा सारा ध्यान इस बात पर केन्द्रित होना चाहिए कि जो हैवान उसके गुनहगार हैं उनके साथ क्या हो रहा है और क्या होना चाहिए ! देश की धीमी न्याय प्रक्रिया पर हमें भरोसा नहीं है ! यहाँ कोर्ट में मुकदमे सालों तक चलते हैं और ऐसे खतरनाक अपराधी जमानत पर छूट कर फिर उसी तरह के जघन्य अपराधों में लिप्त होकर समाज के लिए खतरा बन कर बेख़ौफ़ घूमते रहते हैं !
भागलपुर वाले केस को आप लोग अभी तक भूले नहीं होंगे जिसमें बारह साल पहले एक ऐसी ही साहसी और बहादुर लड़की पर गुंडों ने प्रतिरोध करने पर एसिड डाल कर उसका चेहरा जला दिया था ! वह लड़की अभी तक न्याय के लिए प्रतीक्षा कर रही है और उसके गुनहगार सालों जमानत पर छूट कर ऐशो आराम की ज़िंदगी बसर करते रहे साथ ही अपने गुनाहों के सबूत मिटाते रहे !
मेरे विचार से ऐसे गुनहगारों को कोर्ट कचहरी के टेढ़े-मेढ़े रास्तों, वकीलों और जजों की लम्बी-लम्बी बहसों और हर रोज़ आगे बढ़ती मुकदमों की तारीखों की भूलभुलैया से निकाल कर सीधे समाज के हवाले कर देना चाहिए ! सर्व सम्मति से समाज के हर वर्ग और हर क्षेत्र से प्रबुद्ध व्यक्तियों की समिति बनानी चाहिए जिनमें प्राध्यापक, वकील, जज, कलाकार, गृहणियाँ, डॉक्टर्स, इंजीनियर्स, व्यापारी, साहित्यकार व अन्य सभी विधाओं से जुड़े लोग शामिल हों और सबकी राय से उचित फैसला किया जाना चाहिए और गुनहगारों को दंड भी सरे आम दिया जाना चाहिए ताकि बाकी सभी के लिए ऐसा फैसला सबक बन सके !
ऐसे अपराधियों के माता-पिता से पूछना चाहिए कि वे अपने ऐसे कुसंस्कारी और हैवान बेटों के लिए खुद क्या सज़ा तजवीज करते हैं ! अगर वे अपने बच्चों के लिए रहम की अपील करते हैं तो उनसे पूछना चाहिए की यदि उनकी अपनी बेटी के साथ ऐसी दुर्घटना हो जाती तो क्या वे उसके गुनहगारों के लिए भी रहम की अपील ही करते ? इतनी खराब परवरिश और इतने खराब संस्कार अपने बच्चों को देने के लिए स्वयम उन्हें क्या सज़ा दी जानी चाहिए ? दामिनी के गुनहगार उन दरिंदों पर कोल्ड ब्लडेड मर्डर का आरोप लगाया जाना चाहिए और उन्हें तुरंत कड़ी से कड़ी सज़ा मिलनी चाहिये !
लेकिन यह भी सच है कि हमारे आपके चाहने से क्या होगा ! होगा वही जो इस देश की धीमी गति से चलने वाली व्यवस्था में विधि सम्मत होगा ! मगर इतना तो हम कर ही सकते हैं कि इतने घटिया लोगों का पूरी तरह से सामाजिक बहिष्कार कर दिया जाए ! जिन लोगों के ऊपर बलात्कार के आरोप सिद्ध हो चुके हैं उनकी तस्वीरें, नाम, पता व सभी डिटेल हर रोज़ टी वी पर और अखबारों में दिखाए जाने चाहिए ताकि ऐसे लोगों से जनता सावधान रह सके ! समाज के आम लोगों के साथ घुलमिल कर रहने का इन्हें मौक़ा नहीं दिया जाना चाहिए ! यदि किरायेदार हैं तो इन्हें तुरंत घर से निकाल बाहर करना चाहिए और यदि मकान मालिक हैं तो ऐसा क़ानून बनाया जाना चाहिए कि इन्हें इनकी जायदाद से बेदखल किया जा सके ! जब तक कड़े और ठोस कदम नहीं उठाये जायेंगे ये मुख्य धारा में सबके बीच छिपे रहेंगे और मौक़ा पाते ही अपने घिनौने इरादों को अंजाम देते रहेंगे ! जब दंड कठोर होगा और परिवार के अन्य सदस्य भी इसकी चपेट में आयेंगे तो घर के लोग भी अपने बच्चों के चालचलन पर निगरानी रखेंगे और लगाम खींच कर रखेंगे ! यदि इन बातों पर ध्यान दिया जाएगा तो आशा कर सकते हैं कि ऐसी घटनाओं की आवृति में निश्चित रूप से कमी आ जाएगी !
दामिनी का बलिदान निरर्थक नहीं जाना चाहिए ! उस मासूम बच्ची के लिए दिल बहुत दुखी है ! कुछ तो ऐसा ज़रूर होना चाहिए कि उसकी आत्मा को शान्ति मिले और समाज की सभी महिलाओं को सुरक्षा का सच्चा आश्वासन मिले !

साधना वैद