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Monday, December 28, 2015

सर्दी की रात


सर्दी की रात 
ठिठका सा कोहरा 
ठिठुरा गात ! 

तान के सोया 
कोहरे की चादर 
पागल चाँद ! 

काँपे बदन 
उघड़ा तन मन 
गगन तले ! 

चाय का प्याला 
सर्दी की बिसात पे 
बौना सा प्यादा ! 

लायें कहाँ से 
धरती की शैया पे 
गर्म रजाई ! 

ठंडी हवाएं 
सिहरता बदन
बुझा अलाव ! 

चाय की प्याली 
सर्दी के दानव को 
दूर भगाए ! 

दे दे इतना 
जला हुआ अलाव 
गरम चाय ! 

आँसू की बूँदें 
तारों के नयनों से 
झरती रहीं ! 

तारों के आँसू
आँचल में सहेजे 
धरती माता ! 


साधना वैद